5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर पाये लक्ष्मी व सरस्वती की कृपा

हमारे सनातन धर्म में गुरु को सर्वोपरि बताया गया है इसी कारण वर्ष में एक दिवस हम गुरु को समर्पित करते हैं ऐसा कहां जाता है एक अच्छा गुरु मिलना बहुत ही मुश्किल होता है परंतु ऐसा गुरु जिसको मिल जाए भवसागर में उसकी नैया पार लग जाती है गुरु पूर्णिमा कई मायने में हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है इस पूर्णिमा की रात्रि को यदि हम कुछ ऐसे कार्य करें तो हमारी बुद्धि बहुत ही तीक्ष्ण हो जाती है और हमारे घर में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती अर्थात लक्ष्मी की भी कृपा बहुत रहती है।।
गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह नहा धोकर नित्यकर्म से मुक्त होकर स्नान ध्यान करके सुबह का पहर गुरु को समर्पित किया जाता हैअगर आपने अभी तक किसी को अपना गुरु नहीं बनाया है तो इस गुरु पूर्णिमा पर भगवान शिव को अपना गुरु मानकर उनका मात्र जल से अभिषेक करने पर आपको शीघ्र ही सरस्वती की कृपा अर्थात पढ़ाई में अग्रता एवं लक्ष्मी की कृपा अर्थात धन से संबंधित संपन्नता प्राप्त होगी



वेद, पुराण, उपनिशद और महाभारत की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर हुआ था। महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

गुरु को पूजनीय माना गया है और उनके सम्मान के लिए ही गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। गुरु ही मनुष्य का अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है और वह ही सच और गलत के साथ ज्ञान देता है। इसलिए गुरु के सम्मान के लिए गुरु की पूजा करना जरूरी है। गुरु को ब्रह्मा कहा गया है, क्योंकि वह जीव को उसी तरह सर्जन करते हैं, जैसे ब्रह्मा।

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